कबीर जी भगत या परमात्मा
नमस्कार दोस्तों मेरा नाम में लवकुश मैं आपका स्वागत करता हूं स्पिरिचुअल नॉलेज में आज हम जानेंगे कि कबीर जी परमात्मा है या भगत जो 600 साल पहले इस पृथ्वी पर आए थे तथा एक कवि की भूमिका निभाई थी उन्होंने काशी में आइए जानते हैं।
कबीर साहेब का कलयुग में प्राकाट्य
विक्रमी संवत् 1455 (सन् 1398) ज्येष्ठ मास की पूर्णिमा सुबह-सुबह ब्रह्ममुहुर्त में
वह पूर्ण परमेश्वर कबीर (कविर्देव) जी स्वयं अपने मूल स्थान सतलोक से आए। काशी
में लहर तारा तालाब के अंदर कमल के फूल पर एक बालक का रूप धारण किया।
पहले मैं आपको नीरू-नीमा के बारे में बताना चाहूँगा कि ये कौन थे? द्वापर युग में
नीरू-नीमा सुपच सुदर्शन के माता पिता थे। इन्होंने कबीर साहेब की बात को उस
समय स्वीकार नहीं किया था। अंत में सुदर्शन ने करूणामय रूप में आए कबीर साहेब
से प्रार्थना की थी कि प्रभु आपने मुझे उपदेश दे दिया तो सब कुछ दे दिया। आपसे
आज तक कुछ माँगने की कोई आवश्यकता ही नहीं पड़ी। क्योंकि आपने सर्व
मनोकामना पूर्ण कर दी तथा जो वास्तविक भक्ति धन है उससे भी परिपूर्ण कर दिया।
एक प्रार्थना है दास की यदि उचित समझो तो स्वीकार कर लेना। मेरे माता पिता यदि
किसी जन्म में कभी मनुष्य शरीर प्राप्त करें तो इनको संभालना प्रभु। ये बहुत
पुण्यात्मा हैं, लेकिन आज इनकी बुद्धि विपरीत हो गई है। ये परमात्मा की वाणी को
मान नहीं रहे। कबीर साहेब ने कहा चिंता न कर, अब तू अपने माता पिता के चक्कर
में यहाँ उलझ जायेगा। आने दे समय इनको भी संभालूंगा। काल जाल से पार करूँगा।
तू निश्चिंत होकर सतलोक जा। सुदर्शन जी सतलोक चले गये।
कबीर जी परमात्मा है प्रमाण
"शिशु कबीर देव द्वारा कुँवारी गाय का दूध पीना’’
जब बालक कबीर को दूध पिलाने की कोशिश में नीरू नीमा असफल रहे। तब कबीर साहेब ने कहा कुँवारी गाय ले आओ मैं उसका दूध पीऊँगा। ऐसा ही हुआ।
ऋग्वेद मण्डल 9 सूक्त 1 मंत्र 9 में प्रमाण है कि पूर्ण परमात्मा अमर पुरुष जब लीला करता हुआ बालक रूप धारण करके स्वयं प्रकट होता है तब कुँवारी गाय अपने आप दूध देती है जिससे उस पूर्ण प्रभु की परवरिश होती है।
काशी के पंडितों का मानना था कि जो मगहर मैं मरता है वह गधा बनता है इस भ्रम के निवारण के लिए कबीर जी ने कहा कि मैं मगहर मारूंगा उस समय उनकी आयु 120 वर्ष थी वह काशी से मगहर तक चले गए और वहां पर दोनों राजा हिंदू और मुसलमान जो उनके शिष्य थे वीर सिंह बघेल दोनों ही वहां पर अपनी अपनी सेना के साथ इकट्ठे हो गए। तथा कहने लगे कि गुरुदेव का अंतिम संस्कार हम अपने रिती रिवाज से करेंगे। कबीर जी ने कहा की यहां नीचे एक चद्दर बिछाओ उस पर कुछ फूल डालो और मुझे ऊपर से एक चद्दर उढा दो और फिर कुछ देर बाद आकाश से आवाज आई फिर तुम क्या ढूंढ रहे हो मैं तो जा रहा हूं सतलोक यह सुनते ही दोनों राजा दौड़कर अंदर गए जब उन्होंने चद्दर हटाई तो उनके शरीर की जगह फूल ही फूल थे और आधे फूल हिंदू ने आधे मुसलमानों ने लिए तथा एक्ने मजार बनाई और एक ने मंदिर आज भी वह मगर में स्थापित हैं इससे सिद्ध होता है कि कबीर जी पूर्ण परमात्मा है जिन का बखान वेद भी करते हैं तथा सभी धर्मों के सद ग्रंथ गवाही देते हैं।
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