MagharLeela_Of_GodKabir
नमस्कार दोस्तों में लव कुश आपका स्वागत करता हूं स्प्रिचुअल नॉलेज ब्लॉग में आज हम बात करेंगे कबीर परमात्मा की लीला की परमात्मा चारों युगों में आते हैं और किसी तालाब में कमल के फूल के ऊपर अवतरित होते हैं और इस प्रकार के लीला करते हैं तथा छोटी सी उम्र में ही वह ऋषि महर्षियों के ज्ञान में छक्के छुड़ा देते हैं। और अपने निजधाम सतलोक से यह सशरीर ही आते हैं और सशरीर ही जाते हैं।
उनकी जन्म और मृत्यु नहीं होती उसी को परमात्मा कहते हैं जिसका नाम कबीर है।
चार दाग से सतगुरु न्यारा, अजरो अमर शरीर।
दास मलूक सलूक कहत हैं, खोजो खसम कबीर।।
शिव जी के द्वारा श्राप दी हुई नदी मे जल बहाना
कबीर परमात्मा द्वारा शिवजी के श्राप से सूखी नदी में जल बहाना
मगहर में पहुंचते ही परमात्मा कबीर जी ने जब बहते पानी में स्नान करने की इच्छा जताई तो बिजली खां ने कहा कि यहां एक आमी नदी है जो शिवजी के श्राप से सूखी हुई है। परमात्मा कबीर जी ने नदी के किनारे पर पहुंचकर उंगली के इशारे से वर्षों से सूखी नदी में जल प्रवाहित कर दिया ।
हिंदू मुसलमान के भेदभाव को मिटाना
हिंदू राजा बीर सिंह बघेल और मुस्लिम राजा बिजली ख़ाँ पठान को कबीर परमात्मा ने सतलोक जाने से पहले कहा जो मेरे जाने के बाद मिले आधा आधा बांट लेना। दो चद्दर और सुगंधित फूल मिले, परमात्मा का शरीर नहीं मिला था।
बीरसिंघ बघेला करै बीनती , बिजली खाँ पठाना हो । दो चदरि बकसीस करी हैं , दीनां यौह प्रवाना हो ।।
हिन्दू व मुसलमानों के बीच धार्मिक सामंजस्य और भाईचारे की जो विरासत कबीर परमात्मा छोड़कर गए हैं उसे मगहर में आज भी जीवंत रूप में देखा जा सकता है।
मगहर में जहाँ कबीर परमेश्वर जी सशरीर सतलोक गए थे, वहां हिंदू-मुसलमानों के मंदिर और मजार 100-100 फुट की दूरी पर बने हुए हैं।
"कबीर, विहंसी कहयो तब तीनसै, मजार करो संभार।
हिन्दू तुरक नहीं हो, ऐसा वचन हमार।"
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