भगवान कैसा है

               
                     1.  शास्त्रों में प्रमाण

         गुरु नानक,धर्मदास जी, गरीब दास जी महाराज,घीसा दास, दादू जी सभी ने सतलोक को देखा और सतलोक में विराजमान कबीर परमात्मा को देखा है। और फिर इन महापुरुषों ने कबीर परमात्मा की कलमतोड़ महिमा लिखी।
God in form / God bless
God in form


ऋग्वेद मण्डल 9 सूक्त 96 मंत्र 18 में प्रमाण है कि पूर्ण परमात्मा कविर्देव तीसरे मुक्ति धाम अर्थात् सतलोक में रहता है। जहाँ जाने के बाद मनुष्य का फिर से जन्म मरण नहीं होता है।
पवित्रा बाईबल तथा पवित्रा कुरान शरीफ में सृष्टी रचना का प्रमाण“
इसी का प्रमाण पवित्रा बाईबल में तथा पवित्रा कुरान शरीफ में भी है।
कुरान शरीफ में पवित्रा बाईबल का भी ज्ञान है, इसलिए इन दोनों पवित्रा सद्ग्रन्थों
ने मिल-जुल कर प्रमाणित किया है कि कौन तथा कैसा है सृष्टी रचनहार तथा उसका
वास्तविक नाम क्या है।
पवित्रा बाईबल (उत्पत्ति ग्रन्थ पृष्ठ नं. 2 पर, अ. 1ः20 - 2ः5 पर)
छटवां दिन :- प्राणी और मनुष्य :
अन्य प्राणियों की रचना करके 26. फिर परमेश्वर ने कहा, हम मनुष्य को अपने स्वरूप
के अनुसार अपनी समानता में बनाएं, जो सर्व प्राणियों को काबू रखेगा।

Kabir is god / Jesus
God save us 


27. तब परमेश्वर ने
मनुष्य को अपने स्वरूप के अनुसार उत्पन्न किया, अपने ही स्वरूप के अनुसार परमेश्वर ने
उसको उत्पन्न किया, नर और नारी करके मनुष्यों की सृष्टी की।
29. प्रभु ने मनुष्यों के खाने के लिए जितने बीज वाले छोटे पेड़ तथा जितने पेड़ों में बीज
वाले फल होते हैं वे भोजन के लिए प्रदान किए हैं, (माँस खाना नहीं कहा है।)
सातवां दिन :- विश्राम का दिन :
परमेश्वर ने छः दिन में सर्व सृष्टी की उत्पत्ति की तथा सातवें दिन विश्राम किया।
पवित्रा बाईबल ने सिद्ध कर दिया कि परमात्मा मानव सदृश शरीर में है, जिसने
छः दिन में सर्व सृष्टी की रचना की तथा फिर विश्राम किया।

पवित्रा कुरान शरीफ (सुरत फुर्कानि 25, आयत नं. 52, 58, 59)
आयत 52 :- फला तुतिअल् - काफिरन् व जहिद्हुम बिही जिहादन् कबीरा
(कबीरन्)।।52।
इसका भावार्थ है कि हजरत मुहम्मद जी का खुदा (प्रभु) कह रहा है कि हे पैगम्बर !
आप काफिरों (जो एक प्रभु की भक्ति त्याग कर अन्य देवी-देवताओं तथा मूर्ति आदि की
पूजा करते हैं) का कहा मत मानना, क्योंकि वे लोग कबीर को पूर्ण परमात्मा नहीं मानते।
आप मेरे द्वारा दिए इस कुरान के ज्ञान के आधार पर अटल रहना कि कबीर ही पूर्ण प्रभु है
तथा कबीर अल्लाह के लिए संघर्ष करना (लड़ना नहीं) अर्थात् अडिग रहना।
आयत 58 :- व तवक्कल् अलल् - हरिल्लजी ला यमूतु व सब्बिह् बिहम्दिही व कफा
बिही बिजुनूबि िअबादिही खबीरा (कबीरा)।।58।
भावार्थ है कि हजरत मुहम्मद जी जिसे अपना प्रभु मानते हैं वह अल्लाह (प्रभु)
किसी और पूर्ण प्रभु की तरफ संकेत कर रहा है कि ऐ पैगम्बर उस कबीर परमात्मा पर
विश्वास रख जो तुझे जिंदा महात्मा के रूप में आकर मिला था। वह कभी मरने वाला
नहीं है अर्थात् वास्तव में अविनाशी है। तारीफ के साथ उसकी पाकी (पवित्रा महिमा)
का गुणगान किए जा, वह कबीर अल्लाह (कविर्देव) पूजा के योग्य है
               2. कौन तथा कैसा है कुल का मालिक
श्री रामानन्द जी मेरे गुरु जी हैं। यह कह कर श्री धर्मदास जी की आत्मा को
वापिस शरीर में भेज दिया। श्री धर्मदास जी का शरीर दो दिन बेहोश रहा, तीसरे
दिन होश आया तो काशी में खोज करने पर पाया कि यही काशी में आया धाणक
ही पूर्ण परमात्मा (सतपुरुष) है। आदरणीय धर्मदास साहेब जी ने पवित्रा कबीर
सागर, कबीर साखी, कबीर बीजक नामक सद्ग्रन्थों की आँखों देखे तथा पूर्ण
परमात्मा के पवित्रा मुख कमल से निकले अमृत वचन रूपी विवरण से रचना की।
अमृत वाणी में प्रमाण :


आज मोहे दर्शन दियो जी कबीर।।टेक।।
सत्यलोक से चल कर आए, काटन जम की जंजीर।।1।।
थारे दर्शन से म्हारे पाप कटत हैं, निर्मल होवै जी शरीर।।2।।
अमृत भोजन म्हारे सतगुरु जीमैं, शब्द दूध की खीर।।3।।
हिन्दू के तुम देव कहाये, मुस्लमान के पीर।।4।।
दोनों दीन का झगड़ा छिड़ गया, टोहे ना पाये शरीर।।5।।
धर्मदास की अर्ज गोसांई, बेड़ा लंघाईयो परले तीर।।6।
(ख) आदरणीय दादू साहेब जी (अमृत वाणी में प्रमाण) कबीर परमेश्वर
के साक्षी -
आदरणीय दादू साहेब जी जब सात वर्ष के बालक थे तब पूर्ण परमात्मा जिंदा
महात्मा के रूप में मिले तथा सत्यलोक ले गए। तीन दिन तक दादू जी बेहोश रहे।
होश में आने के पश्चात् परमेश्वर की महिमा की आँखों देखी बहुत-सी अमृतवाणी
उच्चारण की :

जिन मोकुं निज नाम दिया, सोइ सतगुरु हमार। दादू दूसरा कोई नहीं, कबीर सृजन हार।।
दादू नाम कबीर की, जै कोई लेवे ओट। उनको कबहू लागे नहीं, काल बज्र की चोट।।
दादू नाम कबीर का, सुनकर कांपे काल। नाम भरोसे जो नर चले, होवे न बंका बाल।।
जो जो शरण कबीर के, तरगए अनन्त अपार। दादू गुण कीता कहे, कहत न आवै पार।।
कबीर कर्ता आप है, दूजा नाहिं कोय। दादू पूरन जगत को, भक्ति दृढावत सोय।।
ठेका पूरन होय जब, सब कोई तजै शरीर। दादू काल गँजे नहीं, जपै जो नाम कबीर।।
आदमी की आयु घटै, तब यम घेरे आय। सुमिरन किया कबीर का, दादू लिया बचाय।।
मेटि दिया अपराध सब, आय मिले छनमाँह। दादू संग ले चले, कबीर चरण की छांह।।
सेवक देव निज चरण का, दादू अपना जान। भृंगी सत्य कबीर ने, कीन्हा आप समान।।
दादू अन्तरगत सदा, छिन-छिन सुमिरन ध्यान। वारु नाम कबीर पर, पल-पल मेरा प्रान।।
सुन-2 साखी कबीर की, काल नवावै माथ। धन्य-धन्य हो तिन लोक में, दादू जोड़े हाथ।।
केहरि नाम कबीर का, विषम काल गज राज। दादू भजन प्रतापते, भागे सुनत आवाज।।
पल एक नाम कबीर का, दादू मनचित लाय। हस्ती के अश्वार को, श्वान काल नहीं खाय।।
सुमरत नाम कबीर का, कटे काल की पीर। दादू दिन दिन ऊँचे, परमानन्द सुख सीर।।
दादू नाम कबीर की, जो कोई लेवे ओट। तिनको कबहुं ना लगई, काल बज्र की चोट।।
और संत सब कूप हैं, केते झरिता नीर। दादू अगम अपार है, दरिया सत्य कबीर।।
अबही तेरी सब मिटै, जन्म मरन की पीर। स्वांस उस्वांस सुमिरले, दादू नाम कबीर।।
कोई सर्गुन में रीझ रहा, कोई निर्गुण ठहराय। दादू गति कबीर की, मोते कही न जाय।।

                         वेदों में प्रमाण

वेदों में प्रमाण prave in vedas



ऋग्वेद मं. 10 सु. 49 मं. 1 तथा 6त्र यजुर्वेद अध्याय 13 मं.
4 में) - हे मनुष्यों जो सृष्टी
के पूर्व सर्व की उत्पति करता तथा सर्व का स्वामी था, है, आगे भी रहेगा वही सर्व
सृष्टी को बनाकर धारण कर रहा है। उस सुख स्वरूप परमात्मा की भक्ति जैसे
हम (ब्रह्म तथा अन्य देव भी उसी की साधना) करते हैं वैसे ही तुम लोग भी करो।
प्रमाण - 1. पवित्रा यजुर्वेद अध्याय 29 मंत्रा 25 -
समिद्धोऽअद्य मनुषो दुरोणे देवो देवान्यजसि जातवेदः।
आ च वह मित्रामहश्चिकित्वान्त्वं दूतः कविरसि प्रचेताः।।25।।
 समिद्धः-अद्य-मनुषः-दुरोणे-देवः-देवान्-यज्-असि- जात-वेदः-आ- च-वह-
मित्रामहः-चिकित्वान्-त्वम्-दूतः- कविर्-असि-प्रचेताः।
 अनुवाद - (अद्य) आज अर्थात् वर्तमान में (दुरोणे) शरीर रूप महल में दुराचार पूर्वक
(मनुषः) झूठी पूजा में लीन मननशील व्यक्तियों को (समिद्धः) लगाई हुई आग अर्थात् शास्त्रा
विधि रहित वर्तमान पूजा जो हानिकारक होती है, अग्नि जला कर भस्म कर देती है ऐसे साधक
का जीवन शास्त्राविरूद्ध साधना नष्ट कर देती है। उसके स्थान पर (देवान्) देवताओं के (देवः)
देवता (जातवेदः) पूर्ण परमात्मा सतपुरुष की वास्तविक (यज्) पूजा (असि) है। (आ) दयालु ,
(मित्रामहः) जीव का वास्तविक साथी पूर्ण परमात्मा के (चिकित्वान्) स्वस्थ ज्ञान अर्थात् यथार्थ
भक्ति को (दूतः) संदेशवाहक रूप में (वह) लेकर आने वाला (च) तथा (प्रचेताः) बोध कराने वाला
(त्वम्) आप (कविर्देव अर्थात् कबीर परमेश्वर) कबीर (असि) है।
भावार्थ :- जिस समय भक्त समाज को शास्त्राविधी त्यागकर मनमाना आचरण
(पूजा) कराया जा रहा होता है। उस समय कविर्देव (कबीर परमेश्वर) तत्व ज्ञान
को प्रकट करता है।
 प्रमाण 2. पवित्रा सामवेद संख्या 1400 में
 संख्या न. 359 सामवेद अध्याय न. 4 के खण्ड न. 25 का श्लोक न. 8 -
पुरां भिन्दुर्युवा कविरमितौजा अजायत। इन्द्रो विश्वस्य कर्मणो धर्ता वज्री पुरुष्टुतः ।।4।।
 पुराम्µभिन्दुःµयुवाµकविर्µअमितµऔजाµ अजायतµइन्द्रःµविश्वस्यµ कर्मणःµ
धर्ताµवज्रीµ पुरूष्टुतः।
 शब्दार्थ :- (युवा) पूर्ण समर्थ (कविर्) कविर्देव अर्थात् कबीर परमेश्वर (अमितऔजा) विशाल
शक्ति युक्त अर्थात् सर्व शक्तिमान है (अजायत) तेजपुंज का शरीर मायावयी बनाकर (धर्ता)
प्रकट होकर अर्थात् अवतार धारकर (वज्री) अपने सत्यशब्द व सत्यनाम रूपी शस्त्रा से (पुराम्)
काल-ब्रह्म के पाप रूपी बन्धन रूपी कीले को (भिन्दुः) तोड़ने वाला, टुकड़े-टुकड़े करने वाला
(इन्द्रः) सर्व सुखदायक परमेश्वर (विश्वस्य) सर्व जगत के सर्व प्राणियों को (कर्मणः) मनसा वाचा
कर्मणा अर्थात् पूर्ण निष्ठा के साथ अनन्य मन से धार्मिक कर्मो द्वारा सत्य भक्ति से (पुरूष्टुतः)
स्तुति उपासना करने योग्य है।
{जैसे बच्चा तथा वृद्ध सर्व कार्य करने में समर्थ नहीं होते जवान व्यक्ति सर्व कार्य करने
की क्षमता रखता है। ऐसे ही परब्रह्म-ब्रह्म व त्रिलोकिय ब्रह्मा-विष्णु-शिव तथा अन्य देवी-देवताओं
को बच्चे तथा वृद्ध समझो इसलिए कबीर परमेश्वर को युवा की उपमा वेद में दी है}
भावार्थ :- जो कविर्देव (कबीर परमेश्वर) तत्वज्ञान लेकर संसार में आता है। वह
सर्वशक्तिमान है तथा काल (ब्रह्म) के कर्म रूपी किले को तोड़ने वाला है वह सर्व सुखदाता

है तथा सर्व के पुजा करने योग्य है
और भी अनेकों प्रमाण है जिन से सिद्ध होता है कि कबीर ही पूर्ण परमात्मा है और सबका मालिक है जो आज इस पृथ्वी पर संत रामपाल जी महाराज के रूप में अवतरित हुए हैं और हमें सतलोक ले जाने के लिए नाम लिख साथ दे रहे हैं और हमें सचेत कर रहे हैं कि वापस अपने सतलोक पर चलो।

अधिक जानकारी के लिए जरूर देखें साधना चैनल शाम 7:30 से 8:30 बजे तक और ईश्वर चैनल पर शाम 8:30 से 9:30 बजे तक

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