आओ पर्यावरण बचाएं
नमस्कार दोस्तों
आज हम बात करेंगे पर्यावरण के बारे में देखा जा रहा है दुनिया में बढ़ते जा रहे हैं मशीनरी काम फैक्ट्री और वाहनों के कारण दिन-ब-दिन हमारा पर्यावरण दूषित होता जा रहा है साथ ही नदियों के किनारे बसे शहर नदियों को भी गंदा कर रहे हैं और इनमें से निकलता दुंआ पर्यावरण की ओजोन परत को क्षतिग्रस्त कर रहा है। पर्यावरण को दूषित करने में कोई भी व्यक्ति पीछे नहीं रह रहा है। कोई फैक्ट्री डाल रहा है तो कोई वनों की कटाई कर रहा है। और हम बढ़ते हुए समय के साथ नई-नई तकनीकों का इस्तेमाल करते ही जा रहे हैं परंतु पर्यावरण की तरफ हमारा जरा भी ध्यान नहीं है। पर्यावरण हमें शुद्ध वायु देती है । और समय-समय पर वर्षा देती हैं परंतु मानव ने आज पर्यावरण का सारा शेडूल ही बदल कर रख दिया है।
आज मानव तरह-तरह की बीमारियों से ग्रसित हैं। और जिसकी आयु घटती जा रही हैं उसको स्वांस की बीमारी तो हो नहीं है। क्योंकि यह नियम हो गया अब कि जो भी वृद्ध होने को जा रहा है उसको स्वास की कमी तो होगी ही क्योंकि यह वातावरण बहुत ही दूषित कर दिया मानव ने इंसान प्रकृति को बदलना चाहता है। परंतु इस को अंदाजा नहीं प्रकृति क्या कर सकती है। प्रकृति के साथ छेड़छाड़ कर मानव ने बहुत बड़ी मुसीबत खड़ी कर दी हैं। आज जहां रेगिस्तान है वह वर्षा का नामोनिशान नहीं परंतु आज उस जगह भी ओले गिर रहे हैं और जहां वर्षा होनी चाहिए वहां वर्षा का पता ही नहीं। समय से पहले बरसात हो रही है बर्फ गिर रही है और आंधी तूफान आ रहे हैं बाढ़ आ रही हैं। यह सब मानव का ही किया धरा है। अगर हम प्रकृति को साथ लेकर चलें उसके अनुकूल चलें तो हम बच सकते हैं अन्यथा एक दिन हमारा अंत निश्चित है।
ऐसे होगापर्यावरण शुद्ध
हमको सभी को जगह-जगह पेड़ लगाने चाहिए और वनों की कटाई नहीं करनी चाहिए।
नमस्कार दोस्तों
आज हम बात करेंगे पर्यावरण के बारे में देखा जा रहा है दुनिया में बढ़ते जा रहे हैं मशीनरी काम फैक्ट्री और वाहनों के कारण दिन-ब-दिन हमारा पर्यावरण दूषित होता जा रहा है साथ ही नदियों के किनारे बसे शहर नदियों को भी गंदा कर रहे हैं और इनमें से निकलता दुंआ पर्यावरण की ओजोन परत को क्षतिग्रस्त कर रहा है। पर्यावरण को दूषित करने में कोई भी व्यक्ति पीछे नहीं रह रहा है। कोई फैक्ट्री डाल रहा है तो कोई वनों की कटाई कर रहा है। और हम बढ़ते हुए समय के साथ नई-नई तकनीकों का इस्तेमाल करते ही जा रहे हैं परंतु पर्यावरण की तरफ हमारा जरा भी ध्यान नहीं है। पर्यावरण हमें शुद्ध वायु देती है । और समय-समय पर वर्षा देती हैं परंतु मानव ने आज पर्यावरण का सारा शेडूल ही बदल कर रख दिया है।
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| फैक्ट्री से निकलता दुआ |
दूषित वातावरण से नुकसान
आज मानव तरह-तरह की बीमारियों से ग्रसित हैं। और जिसकी आयु घटती जा रही हैं उसको स्वांस की बीमारी तो हो नहीं है। क्योंकि यह नियम हो गया अब कि जो भी वृद्ध होने को जा रहा है उसको स्वास की कमी तो होगी ही क्योंकि यह वातावरण बहुत ही दूषित कर दिया मानव ने इंसान प्रकृति को बदलना चाहता है। परंतु इस को अंदाजा नहीं प्रकृति क्या कर सकती है। प्रकृति के साथ छेड़छाड़ कर मानव ने बहुत बड़ी मुसीबत खड़ी कर दी हैं। आज जहां रेगिस्तान है वह वर्षा का नामोनिशान नहीं परंतु आज उस जगह भी ओले गिर रहे हैं और जहां वर्षा होनी चाहिए वहां वर्षा का पता ही नहीं। समय से पहले बरसात हो रही है बर्फ गिर रही है और आंधी तूफान आ रहे हैं बाढ़ आ रही हैं। यह सब मानव का ही किया धरा है। अगर हम प्रकृति को साथ लेकर चलें उसके अनुकूल चलें तो हम बच सकते हैं अन्यथा एक दिन हमारा अंत निश्चित है।
पर्यावरण को शुद्ध रखने के उपाय
हमको सभी को जगह-जगह पेड़ लगाने चाहिए और वनों की कटाई नहीं करनी चाहिए।
पुराने समय में ऋषि महर्षि हवन यज्ञआदि किया करते थे वर्षा के लिए जिससे समय पर वर्षा होती है। परंतु उससे भी सहज उपाय संत रामपाल जी महाराज ने बताए हैं उन्होंने वेदों अनुसार साधना बताइए जिससे पर्यावरण को बचाया जा सकता है और समय-समय पर बरसात भी हो सकती हैं। वेदों में प्रमाण है की अगर हम ज्योति जलाएं जिसमें कम कार्बन डाइऑक्साइड निकलती है और उसका वाष्पीकरण होता है तो वह पूरे ब्रह्मांड में जाता है जिससे समय-समय पर वर्षा होती हैं। ना की हवन में किलो के किलो लकड़ियां और क्विंटल घी जलाने से। और कैसे हैं बहुत से सहज उपाय बताए हैं जिसे मानव अपने कल्याण की ओर निरंतर बढ़ रहा है ।
अधिक जानकारी के लिए अवश्य देखिए साधना चैनल शाम 7:30 से 8:30 बजे तक।
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धन्यवाद

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