भक्ति क्यों जरूरी है
अपने शास्त्रों में लिखा है और सभी कहते हैं कि मनुष्य जीवन सिर्फ मोक्ष प्राप्त करने के लिए ही मिलता है और मनुष्य जीवन में बातें करना बहुत ही आवश्यक है। परमेश्वर ने कहां है
मानुष जन्म दुर्लभ है मिले ना बारंबार तरुवर से पत्ता टूट गिरे फिर बहुर ना लगता डाल।।
अगर इसमें से जीवन से चूक गए और सत भक्ति कि नहीं पूर्ण गुरु से नाम दीक्षा लेकर शास्त्र अनुसार भक्ति नहीं की तो 84 लाख योनि मैं कष्ट उठाना पड़ेगा उनमें कुत्ते गधे सूअर आदि बनना पड़ेगा।
गरीब नर सेती तू पशुआ कीजिए गधा बेल बनाई छप्पन भोग कहां मन बोरे कुरड़ी चरने जाई।।
मनुष्य जीवन सिर्फ और सिर्फ परमात्मा की भक्ति करके मुक्त करवाने के लिए ही मिला है क्योंकि आज हम देखते हैं यहां किसी का कोई भरोसा नहीं है कभी मां मर जाती है कभी भाई मर जाता है कभी कहीं एक्सीडेंट हो जाता है और अचानक हंसते खेलते मृत्यु को प्राप्त हो जाते हैं यहां जीवन बहुत ही कठिन है इसलिए हमें उस सच्चे लोग की तलाश करनी होगी। जो हमें जीने की राह सिखाते हैं जहां जाने के पश्चात लोट करे संसार में कभी नहीं आते गीता
अध्याय नंबर 18 के श्लोक नंबर 62 में भी कुछ इस प्रकार ही कहा है की है अर्जुन तू सर्व भाव से उस परमेश्वर की शरण में जा जहां जाने के पश्चात तू लोट कर इस संसार में कभी नहीं आएगा और मैं तुझे सर्व पापों से मुक्त कर दूंगा।।
वह परमात्मा सर्व पापों को काट देता है और सर्व सुख प्रदान करता है वह कभी किसी को दुख नहीं देता। और जिस लोक में हम रह रहे हैं यह काल का लोक हैं जहां हरदम हमें कष्ट पर कष्ट उठाने पड़ते हैं। अगर हमेशा के लिए अजर अमर होना है और इन 8400000 योनियों में नहीं आना तो पूर्ण गुरु से नाम दीक्षा लेकर सत भक्ति करनी चाहिए और जीवन कल्याण करवाना चाहिए।
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सत साहेब
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