मोबाइल और समाज

मोबाइल के दुष्प्रभाव

 आज छोटे छोटे बच्चों का मोबाइल से खेलना आम बात है । अक्सर माता पिता रोते बच्चों को चुप कराने के लिए या फिर बच्चों का ध्यान हटाने के लिए उनके हाथ में मोबाइल फ़ोन दे देते हैं जिसमें बच्चे अक्सर कार्टून या फिल्म वगैरा देखते रहते हैं । कई बार तो बच्चे घंटों तक मोबाइल पर गेम ही खेलते रहते हैं । माँ घर का काम निपटाने के लिए बच्चों को मोबाइल से देर तक खेलने देती है और कभी कभी तो ऐसा भी देखा गया है कि अपना फेवरिट सीरियल देखते वक़्त छोटा बच्चा डिस्टर्ब न करे , इसलिए भी माँ उन्हें मोबाइल से एंगेज कर लेती है । मोबाइल फ़ोन एक बहुत ही उपयोगी गैजेट है लेकिन दो तीन साल के बच्चों को मोबाइल इस्तेमाल करने देना बच्चों के शारीरिक और मानसिक विकास के लिए गंभीर रूप से हानिकारक हो सकता है ।


मोबाइल एक झलक

आज मोबाइल एक ऐसा यन्त्र है जिसके बारे में बताने की कोई जरुरत नहीं है. आदिकाल से ही मनुष्य ने संचार के लिये तरह तरह के उपाय और प्रयोग किये हैं. वह समय कैसा रहा होगा, जब मानव सांकेतिक भाषा में बात करते होंगे. बड़े बड़े राजा अपना सन्देश ढोल- नगाड़े बजाकर, तेज घुड़सवारों द्वारा और कबूतरों द्वारा भेजा करते थे.ग्राहम बेल के आविष्कार टेलीफोन ने दूर बैठे लोगों से बातचीत को संभव बना दिया, लेकिन मोबाइल ने तो मानो दुनिया को एक छोटी सी डब्बी में बंद कर दिया. आज आप मोबाइल प्रायः हर किसी के हाथ में देख सकते हैं. यह सर्वव्यापी हो चुका है.



मोबाइल के उपयोग

मोबाइल हजारों किलोमीटर दूर बैठे व्यक्ति से अपनी भावना, विचार, जरूरतें, समाचारों का आदान प्रदान, आदि करने का सबसे आसान, सबसे तेज और आधुनिकतम साधन है.

2. आप यूँ कह सकते हैं कि आज मोबाइल और उसमें स्थित इन्टरनेट आपके सारे काम घर बैठे करा देता है. टिकट बुक करना हो, Paytm  करना है, बिल pay करना है, डॉक्टर के यहाँ नंबर लगाना है, गैस की बुकिंग करनी है, आदि आदि अनेकों कार्य आपका मोबाइल कर देता है. इससे न सिर्फ समय की बचत होती है बल्कि पैसों की भी बचत होती है.


3. मोबाइल द्वारा आप घर बैठे पूरे दुनिया का समाचार जान सकते हैं, दुनिया के किसी भी देश का रेडियो online सुन सकते हैं, कहाँ क्या हो रहा है, उससे सम्बंधित वेबसाइट पर जाकर पूरी जानकारी प्राप्त कर सकते हैं.

राजनीति और समाज

राजनीति समाज के लिए खतरा


नमस्कार दोस्तों मेरा नाम है लव कुश और आज हम बात करेंगे राजनीति के बारे में दोस्तों राजनीति एक तरह का मकड़जाल है जिसमें कोई फंसना तो नहीं चाहता परंतु राजनीति में कुछ ना कुछ बनना जरूर चाहता है ताकि उस की प्रभुता हो सके और उसको सब नमस्कार करें।
राजनीतिक विचार
राजनीति 

राजनीति में भाई भतीजावाद

अगर कोई भी व्यक्ति राजनीति में किसी ऊंची पोस्ट पर हैं तो वह अपने किसी सदस्य को किसी न किसी पद पर खड़ा करना अवश्य चाहेगा। यह देखा जाता है कि जब भी कोई इलेक्शन होता है या फिर किसी ना किसी कार्यालय, पोस्ट, और सरकारी कामकाज में अपना काम निपटाने के लिए अपने किसी सगे संबंधियों को उस पद पर अपने राजनीतिक शक्ति के बल पर यह कार्य बड़ी भ्रष्ट तरीके से करवाया जाता है। आप देख सकते हैं आम आदमी पार्टी में अखिलेश यादव के बेटे भी राजनीति में है मेरा नाम नीतीश यादव है। मैं किसी को गलत नहीं ठहरा रहा। परंतु यह जरूर कहना चाहूंगा कि अपने राजनीतिक बल पर जिस व्यक्ति को वहां पर होना चाहिए वह उन्हें हटाकर अपने किसी सगे संबंधियों को बिठा देते हैं ताकि अपना काम आसान हो जाए।
राजनीतिक व्यंग्य
राजनीति और समाज

राजनीति का दुष्प्रभाव

आज अपना देश लोकतांत्रिक देश है जहां पर हर किसी को अपने अधिकार का और स्वतंत्र रहने की आजादी है। परंतु आज इसके विपरीत हो रहा है अगर कोई व्यक्ति किसी गलत काम के बारे में आवाज उठाता है तो उसे मार दिया जाता है या धमका कर उसे गलत काम के प्रति कार्य करने को कहा जाता है। अगर अदालत में या कहीं भी कोई गरीब आदमी अपना काम करवाने जाए तो वह नहीं करवा सकता क्योंकि किसी भी काम करने के लिए सबसे पहले रिश्वत की जाती है जो एक गरीब आदमी के पास नहीं है। हर गली मोड नुक्कड़ और बड़े बड़े अधिकारियों के पास अपनी फरियाद लेकर जाते हैं परंतु वह रिश्वत रूपी राक्षस को दिखाकर उन गरीब की आवाज को वहीं दबा देते हैं। और किस जुर्म का पर्दाफाश करने के लिए कोई गवाही देता है तो उसे गवाही देने से पहले ही मरवा दिया जाता है आए दिन आप अखबार में पढ सकते हैं।
राजनीतिक विज्ञान
राजनीति का दुष्प्रभाव

आध्यात्मिक ज्ञान से समाज सुधार

आप देख सकते हैं राजनीतिक नेता मंत्री अधिकारी से आज दिन तक संत रामपाल जी महाराज का कोई संपर्क नहीं है और ना ही कभी रहेगा संत रामपाल जी महाराज जी एकमात्र ऐसे संत हैं जो सभी धर्मों के सद ग्रंथों को खोलकर उनका ज्ञान जनता को बताते हैं तथा उसमें छुपे हुए गूढ़ रहस्य को उजागर करके यह बताते हैं कि परमात्मा एक ही हैं जिस ने हम सब को बनाया । उनका एक ही नारा है।
आध्यात्मिक ज्ञान
समाज सुधारक

जीव हमारी जाति है मानव धर्म हमारा ।
हिंदू मुस्लिम सिख ईसाई धर्म नहीं कोई न्यारा।।

संत रामपाल जी महाराज अपने तत्वज्ञान में बताते हैं कि अगर आपके पास सत भक्ति नहीं है और आपने पूर्ण सतगुरु से नाम दीक्षा लेकर भक्ति नहीं की तो चाहे आप पूरे संसार के राजा ही क्यों ना हो मृत्यु के पश्चात आपको गधा  बनना पड़ेगा और आपका वह महल पैसा जोड़ा जाड़ा धन सब यहीं रह जाता है। और राजनीति में पढ़कर बहुत से गलत कार्य किए जाते हैं जिनसे आपको इस पृथ्वी पर भी हानि उठानी पड़ती है तथा यहां से जाने के बाद भी जिसका कोई औचित्य नहीं। इसलिए अपने शास्त्रों को अवश्य पढ़ना चाहिए तथा पूर्ण गुरु संत रामपाल जी महाराज जी से नाम दीक्षा लेकर सत भक्ति करनी चाहिए जिससे इस पृथ्वी पर भी लाभ मिलेगा और यहां से जाने के बाद भी।

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धर्म का उत्थान कैसे हो रहा है

धर्म की मूल जड़

सभी धर्मों का मूल जड़ अपने सद ग्रंथ हैं जिनसे हमें यह पता चलता है कि हम कौन से धर्म से जुड़े हुए हैं और हमारा भगवान अल्लाह गॉड तथा ईश्वर कौन है। जब इस पृथ्वी का सृजन हुआ था और मनुष्य प्रथम बार इस पृथ्वी पर आया था तब यहां पर कोई धर्म नहीं था। सिर्फ जीव हमारी जाति  है मानव धर्म हमारा हिंदू मुस्लिम सिख ईसाई धर्म नहीं कोई न्यारा ।

Real god Kabir
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शास्त्रों का सच्चा ज्ञान

आज के इस कलयुग के दौर में सभी लोग इतने व्यस्त हो चुके हैं । और भगवान को भूल चुके हैं ना तो उनको भगवान याद हैं । वह उन्हें मंदिरों में पत्थरों में ढूंढते फिर रहे हैं जबकि वह इस प्रकार नहीं मिलेगा उसका सही उपाय हमारे शास्त्र हैं जिनमें प्रमाण सहित बताया गया है कि वह परमात्मा कहां रहता है कौन है कैसा है तथा कैसा दिखता है? आजकल के इस दुनिया में धर्म के ठेकेदार हैं जिन्होंने अपने अपने हिसाब से काफी धर्म बना रखे हैं और लोगों को उन में उलझा रखा है तथा अपने शास्त्रों का ना तो उनको ज्ञान है और ना अपने अनुयायियों को आज के वह बताते हैं कि अपने शास्त्रों में क्या लिखा है। जब तक हमें अपने शास्त्रों का ज्ञान नहीं होगा और पूर्ण सतगुरु नहीं मिलेगा तब तक हम अपने शास्त्रों का ज्ञान नहीं कर सकते।

Real god Kabir
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धर्म का उत्थान

आज के समय में सिर्फ संत रामपाल जी महाराज ऐसे संत जो अपने शास्त्रों का संपूर्ण ज्ञान रखते हैं तथा अपने अनुयायियों को शास्त्रों के अनुसार भक्ति करवाते हैं और करते हैं। और सभी धर्म ग्रंथों की पुस्तकों को खोलकर प्रमाण सहित बताते हैं कि परमात्मा कबीर हैं जो सब लोग में रहते हैं सभी धर्म ग्रंथों से उन्होंने यह प्रमाणित कर दिया है। अपने शास्त्रों के अनुसार सच्चे मंत्र उपदेश देते हैं।
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Saint Rampalji complete guru


सतगुरु के लक्षण कहूं मधुरे बैन विनोद 
चार वेद छह शास्त्र वह कह 18 बोध ।।

यजुर्वेद अध्याय 19 मंत्र 25, 26 में लिखा है कि जो वेदों के अधूरे वाक्यों अर्थात सांकेतिक शब्दों व एक चौथाई श्लोकों को पूरा करके विस्तार से बताएगा व तीन समय की पूजा करवाएगा। वह जगत का उपकारक संत सच्चा सतगुरु होगा।
इस परमार्थ के कार्य को केवल संत रामपाल जी महाराज ही कर रहे हैं।

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कबीर जी भगत या परमात्मा

कबीर जी भगत या परमात्मा


नमस्कार दोस्तों मेरा नाम में लवकुश मैं आपका स्वागत करता हूं स्पिरिचुअल नॉलेज में आज हम जानेंगे कि कबीर जी परमात्मा है या भगत जो 600 साल पहले इस पृथ्वी पर आए थे तथा एक कवि की भूमिका निभाई थी उन्होंने काशी में आइए जानते हैं।

कबीर साहेब का कलयुग में प्राकाट्य



विक्रमी संवत् 1455 (सन् 1398) ज्येष्ठ मास की पूर्णिमा सुबह-सुबह ब्रह्ममुहुर्त में
वह पूर्ण परमेश्वर कबीर (कविर्देव) जी स्वयं अपने मूल स्थान सतलोक से आए। काशी
में लहर तारा तालाब के अंदर कमल के फूल पर एक बालक का रूप धारण किया।
पहले मैं आपको नीरू-नीमा के बारे में बताना चाहूँगा कि ये कौन थे? द्वापर युग में
नीरू-नीमा सुपच सुदर्शन के माता पिता थे। इन्होंने कबीर साहेब की बात को उस
समय स्वीकार नहीं किया था। अंत में सुदर्शन ने करूणामय रूप में आए कबीर साहेब
से प्रार्थना की थी कि प्रभु आपने मुझे उपदेश दे दिया तो सब कुछ दे दिया। आपसे
आज तक कुछ माँगने की कोई आवश्यकता ही नहीं पड़ी। क्योंकि आपने सर्व
मनोकामना पूर्ण कर दी तथा जो वास्तविक भक्ति धन है उससे भी परिपूर्ण कर दिया।
एक प्रार्थना है दास की यदि उचित समझो तो स्वीकार कर लेना। मेरे माता पिता यदि
किसी जन्म में कभी मनुष्य शरीर प्राप्त करें तो इनको संभालना प्रभु। ये बहुत
पुण्यात्मा हैं, लेकिन आज इनकी बुद्धि विपरीत हो गई है। ये परमात्मा की वाणी को
मान नहीं रहे। कबीर साहेब ने कहा चिंता न कर, अब तू अपने माता पिता के चक्कर
में यहाँ उलझ जायेगा। आने दे समय इनको भी संभालूंगा। काल जाल से पार करूँगा।
तू निश्चिंत होकर सतलोक जा। सुदर्शन जी सतलोक चले गये।


कबीर जी परमात्मा है प्रमाण


"शिशु कबीर देव द्वारा कुँवारी गाय का दूध पीना’’
जब बालक कबीर को दूध पिलाने की कोशिश में नीरू नीमा असफल रहे। तब कबीर साहेब ने कहा कुँवारी गाय ले आओ मैं उसका दूध पीऊँगा। ऐसा ही हुआ।
ऋग्वेद मण्डल 9 सूक्त 1 मंत्र 9 में प्रमाण है कि पूर्ण परमात्मा अमर पुरुष जब लीला करता हुआ बालक रूप धारण करके स्वयं प्रकट होता है तब कुँवारी गाय अपने आप दूध देती है जिससे उस पूर्ण प्रभु की परवरिश होती है।



काशी के पंडितों का मानना था कि जो मगहर मैं मरता है वह गधा बनता है इस भ्रम के निवारण के लिए कबीर जी ने कहा कि मैं मगहर मारूंगा उस समय उनकी आयु 120 वर्ष थी वह काशी से मगहर तक चले गए और वहां पर दोनों राजा हिंदू और मुसलमान जो उनके शिष्य थे वीर सिंह बघेल दोनों ही वहां पर अपनी अपनी सेना के साथ इकट्ठे हो गए। तथा कहने लगे कि गुरुदेव का अंतिम संस्कार हम अपने रिती रिवाज से करेंगे। कबीर जी ने कहा की यहां नीचे एक चद्दर बिछाओ उस पर कुछ फूल डालो और मुझे ऊपर से एक चद्दर उढा दो और फिर कुछ देर बाद आकाश से आवाज आई फिर तुम क्या ढूंढ रहे हो मैं तो जा रहा हूं सतलोक यह सुनते ही दोनों राजा दौड़कर अंदर गए जब उन्होंने चद्दर हटाई तो उनके शरीर की जगह फूल ही फूल थे और आधे फूल हिंदू ने आधे मुसलमानों ने लिए तथा एक्ने मजार बनाई और एक ने मंदिर आज भी वह मगर में स्थापित हैं इससे सिद्ध होता है कि कबीर जी पूर्ण परमात्मा है जिन का बखान वेद भी करते हैं तथा सभी धर्मों के सद ग्रंथ गवाही देते हैं।

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Krishna Janmashtami

कृष्ण जन्माष्टमी कृष्ण जी के जन्म होने के उपलक्ष में यह पर्व मनाया जाता है। कृष्ण जी के जन्म के दिन लोग बड़े धूमधाम से उनके जन्मदिन को मनाते हैं और खुशियां मनाते हैं। परंतु दोस्तों आज हम इस अवसर पर आपको कुछ ऐसा बताएंगे जिससे आप दंग रह जाएंगे। आइए जानते हैं हमारे वेदों पुराणों और गीता में कहीं भी नहीं लिखा कि परमात्मा जन्म लेता है अपितु उसमें परमात्मा को जन्म लेने वाला बताया है परमात्मा किसी मां के गर्भ से जन्म नहीं लेता वह स्वयं प्रकट होता है किसी कमल के फूल के ऊपर और कोई दंपत्ति उन्हें वहां से उठाकर ले जाते हैं तथा कुंवारी गायों से उनकी परवरिश होती है इसी रोचक तथ्य पर हम बात करते हैं।
krishnajanmashtami: LordKrishna
Krishnajanmashtami

मीराबाई की भक्ति की सच्चाई

श्री कृष्ण जी की भक्ति मीराबाई जी ने की थी उनसे प्रत्यक्ष बात करती थी। तथा उनके लिए कुछ भी करने के लिए तैयार थी यहां तक कि उन्होंने अपनी जान के भी प्रवाह ना की परंतु सच्चाई हम आपको बताते हैं उनके जीवन में उनकी भेंट संत रविदास जी से हुई जिन्होंने उन्हें बताया कि श्री कृष्ण जी से ऊपर कोई और सकती है जिन्हें परमात्मा कहते हैं और उनका नाम कबीर है वह दंग रह गई संत रविदास जी ने कहा आप स्वयं श्री कृष्ण जी से पूछ सकते हैं मीरा बाई जी ने ऐसा ही किया।और एक रात सिर्फ कृष्ण जी से बात की तथा कहा कि क्या आप मेरी जन्म और मृत्यु से बात कर सकते हो तो श्री कृष्ण जी ने मना कर दिया कहा यह हम नहीं कर सकते।और फिर मेरा भाई को यकीन हो गया और उन्होंने संत रविदास जी से नाम दीक्षा लेकर परमात्मा की भक्ति की तथा अपना मोक्ष  करवाया।
janmashtami2020
KrishnaJanmashtami

पांडवों के यज्ञ को सफल बनाना

एक समय पांडवों ने यज्ञ किया जिसमें सभी ऋषि-मुनियों को आमंत्रित किया यहां तक कि श्री कृष्ण जी भी उस यज्ञ में शामिल थे। पांडव उन्हें अपना गुरु मानते थे। और उनके आदेश अनुसार वह कार्य करते थे। सभी को भोजन कराया गया परंतु वह संख नहीं बजा। उन सब के बाद एक सुपच सुदर्शन नाम के महात्मा थे जिन्होंने परमात्मा कबीर देव जी से नाम ले रखा था। उनको उस यज्ञ में बुलाया गया ऐसा भोजन कराया।जैसे ही उन्होंने भोजन का पहला निवाला मुंह में रखा शंख बजने लगा । परंतु वही संख श्री कृष्ण जी के भोजन करने पर नहीं बजा। इससे सिद्ध हैं कि श्री कृष्ण जी परमात्मा नहीं है। यह तीनों गुणों में से एक हैं यह सत्वगुण प्रधान है और इनकी भी जन्म और मृत्यु होती हैं यह परमात्मा नहीं है।

निष्कर्ष और समाधान

प्रिय पाठकों आपको हम यह बता दें कि परमात्मा साकार है और उसका नाम कबीर है जिसका वर्णन ऋग्वेद मंडल नंबर 9 सितंबर 82 और मंत्र नंबर एक में है। वह परमात्मा अविनाशी है जो सतलोक में रहता है। वह परमात्मा कुछ भी कर सकता है और सर्वगुण संपन्न नहीं तथा सर्वशक्तिमान है। कृष्ण जी ने ताम्रध्वज को जिंदा किया था जिसको आने से चिरवा दिया गया था। परंतु अपने ही भांजे प्रद्युमन को जिंदा नहीं कर सके। इससे स्पष्ट है कि यह सिर्फ उतना ही दे सकते हैं जितना तुम्हारे भाग्य में है या जो तुमने कर्म किया है। जबकि कबीर परमात्मा आपको सब कुछ दे सकते हैं यहां तक कि आपकी आयु भी बढ़ा सकते हैं और मौत को भी मात दे सकते हैं।

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God In Bible

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 नमस्कार दोस्तों मेरा नाम है लव कुश आज कल बात करेंगे परमात्मा के बारे में हमारे सभी शास्त्रों ने साकार है। उसका नाम कबीर है उसी का कुछ प्रमाण हम आज आपको बाइबिल में देंगे। ईसाई धर्म में सभी जीजश को गॉड मानते हैं। जबकि जीसस गॉड नहीं है उस गॉड के फरिश्ते हैं। और कुछ यह भी कहते हैं कि गॉड निराकार है मतलब फार्मलेस आइए जानते हैं कौन कैसा है।
Kabir is god
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1.बाइबिल में सृष्टि रचना
बाइबिल में प्रमाण है कि उस गॉड में इस पूरी पृथ्वी को बनाया और 6 दिन में इस पृथ्वी को बनाकर इसके अंदर जितने भी जीव जंतु हैं तथा मनुष्य हैं उन सबको बनाकर उन्होंने सातवें दें आराम किया तथा अपने सिंहासन पर जा बैठे। और मनुष्य को अपने ही जैसा बनाया है इससे स्पष्ट है कि वह गॉड भी हमारे जैसा ही है।

Kabir is god
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2.हजरत ईसा जी की मृत्यु
हजरत ईसा मसीह की मृत्यु 30 वर्ष की आयु में हुई जो पूर्व ही निर्धारित थी। स्वयं ईसा जी ने कहा कि मेरी मृत्यु निकट है तथा तुम शिष्यों में से ही एक मुझे विरोधियों को पकड़वाएगा और वो मुझे मार देंगे। इससे सिद्ध है हज़रत ईसा जी ने कोई चमत्कार नहीं किया ये सब पहले से ही निर्धारित था। 
Kabir is god
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3.परमात्मा ने नास्तिक होने से बचाया
पूर्ण परमात्मा ही भक्ति की आस्था बनाए रखने के लिए स्वयं प्रकट होता है। पूर्ण परमात्मा ने ही ईसा जी की मृत्यु के पश्चात् ईसा जी का रूप धारण करके प्रकट होकर ईसाईयों के विश्वास को प्रभु भक्ति पर दृढ़ रखा।
🌛यदि पूर्ण परमात्मा ईसा जी का रूप धारण करके प्रकट नहीं होते तब ईसा जी के पूर्व चमत्कारों को देखते हुए ईसा जी का अंत देखकर कोई भी व्यक्ति भक्ति साधना नहीं करता, नास्तिक हो जाते।
(प्रमाण पवित्र बाईबल में यूहन्ना 16: 4-15) ब्रह्म(काल) यही चाहता है।

Kabir is god / Kabir is supreme God
Kabir is god

पवित्र बाईबल (उत्पत्ति ग्रन्थ 1:29)
प्रभु ने मनुष्यों के खाने के लिए जितने बीज वाले छोटे पेड़ तथा जितने पेड़ों में बीज वाले फल होते हैं वे भोजन के लिए प्रदान किए हैं, माँस खाना नहीं कहा है।
उत्पत्ति ग्रन्थ 1:28
परमेश्‍वर ने उन्‍हें यह आशिष दी, ‘फलो-फूलो और पृथ्‍वी को भर दो, और उसे अपने अधिकार में कर लो। समुद्र के जलचरों, आकाश के पक्षियों और भूमि के समस्‍त गतिमान जीव-जन्‍तुओं पर तुम्‍हारा अधिकार हो।’
परमात्मा ने मांस खाने का आदेश नहीं दिया।
Kabir is god
Kabir is supreme God

अय्यूब 36:5 (और्थोडौक्स यहूदी बाइबल - OJB)
परमेश्वर कबीर (शक्तिशाली) है, किन्तु वह लोगों से घृणा नहीं करता है।
परमेश्वर कबीर (सामर्थी) है और विवेकपूर्ण है। जिसने हम सबको बनाया।

Kabir is supreme God
KABIR is god

और भी बहुत से प्रमाण हैं जिन से सिद्ध होता है परमात्मा कबीर ही है बाइबल के अलावा सभी धर्म ग्रंथों में कबीर जी का ही प्रमाण है संत रामपाल जी महाराज सभी धर्मों के धर्म ग्रंथों को खोलकर प्रमाण बताते हैं और उस स्थान के बारे में भी बताते हैं जहां वह गॉड अल्लाह और परमात्मा रब रहता है। जहां पर जाने के बाद लौटकर इन संसार में कोई भी वापस नहीं होता मालिक के साथ सभी सुख पूर्वक रहते हैं।

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DivinePlay_Of_GodKabir

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नमस्कार दोस्तों मेरा नाम में लव कुश आज हम बात करेंगे परमात्मा की लीलाओं के बारे में परमात्मा का नाम कबीर है और वह परमात्मा आज से 600 साल पहले लहरतारा तालाब में कमल के फूल के ऊपर प्रकट हुए थे इसलिए उनका प्रकट दिवस मनाया जाता है जयंती नहीं। 120 वर्ष इस पृथ्वी पर रह कर गए और उन्होंने समाज से बहुत सी बुराइयां खत्म की तथा हिंदू मुस्लिम का झगड़ा भी समाप्त कर दिया और मानवता को सच्ची भक्ति दी तब मोक्ष मार्ग बताया जिनमें से कुछ लेना है आपके सामने है
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 गरीब अनंत कोटि ब्रह्मांड में बंदी छोड़ कहाए
सो तो एक कबीर हैं जो जननी जने न माए ।

1. कबीर साहेब द्वारा सर्वानंद को शरण में लेना

Miracles_Of_GodKabir

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नमस्कार दोस्तों मेरा नाम है लव कुश आपका स्वागत करता हूं स्प्रिचुअल ब्लॉग में आज हम बात करेंगे परमात्मा की चमत्कार के बारे में प परमात्मा विलक्षण मनुष्य के बच्चे के रूप में  कमल के फूल पर जानबूझकर प्रकट होता है। और कुंवारी गायों के दूध से उसकी परवरिश होती हैं। ऐसे कुछ चमत्कार हम आपको बताएंगे। जिनमें से कुछ आपके समक्ष है। 👇👇👇👇

1."शिशु कबीर देव द्वारा कुँवारी गाय का दूध पीना’’


जब बालक कबीर को दूध पिलाने की कोशिश में नीरू नीमा असफल रहे। तब कबीर साहेब ने कहा कुँवारी गाय ले आओ मैं उसका दूध पीऊँगा। ऐसा ही हुआ।
ऋग्वेद मण्डल 9 सूक्त 1 मंत्र 9 में प्रमाण है कि पूर्ण परमात्मा अमर पुरुष जब लीला करता हुआ बालक रूप धारण करके स्वयं प्रकट होता है तब कुँवारी गाय अपने आप दूध देती है जिससे उस पूर्ण प्रभु की परवरिश होती है।


2. मुर्दे को जीवित करना।



ऋग्वेद मण्डल 10 सुक्त 161 मंत्र 2, 5, सुक्त 162 मंत्र 5, सुक्त 163 मंत्र 1 - 3 में प्रमाण मिलता है कि पूर्ण परमात्मा आयु बढ़ा सकता है और कोई भी रोग को नष्ट कर सकता है।
 उसी विधान अनुसार कबीर परमेश्वर ने कमाल, कमाली नाम के मुर्दों को जीवित किया था।

3.‘‘महर्षि सर्वानन्द की माँ शारदा का रोग ठीक करना"



एक सर्वानन्द नाम के महर्षि थे। उसकी आदरणीय माता श्रीमती शारदा देवी पाप कर्म फल से पीडि़त थी। उसने कबीर परमात्मा से उपदेश प्राप्त किया तथा उसी दिन कष्ट मुक्त हो गई। 
क्योंकि पवित्र यजुर्वेद अध्याय 5 मंत्र 32
में लिखा है कि ‘‘कविरंघारिरसि‘‘ अर्थात् (कविर्) कबीर (अंघारि) पाप का शत्रु (असि) है। फिर इसी पवित्र यजुर्वेद अध्याय 8 मंत्र 13 में लिखा है कि परमात्मा (एनसः एनसः) अधर्म के अधर्म अर्थात् पापों के भी पाप घोर पाप को भी समाप्त कर देता है।

4."काशी का अद्भुत भंडारा"


 शेखतकी मुस्लिम पीर ने कबीर साहेब को नीचा दिखाने के लिए 3 दिन के भंडारे की कबीर साहेब के नाम से सभी जगह झूठी चिठ्ठी डलवाई थी कि कबीर जी तीन दिन का भंडारा करेंगे, सभी आना। भोजन के बाद एक मोहर, एक दोहर भी देंगे। कबीर साहेब ने तीन दिन का मोहन भंडारा कराया और लाखों की संख्या में उनके अनुयायी हुए।

5."मृत गऊ को जीवित करना"



सिकंदर लोधी ने एक गऊ के तलवार से दो टुकड़े कर दिये। गऊ को गर्भ था और बच्चे के भी दो टुकड़े हो गए। 
तब सिकंदर लोधी राजा ने कहा कि कबीर, यदि तू खुदा है तो इस गऊ को जीवित कर दे अन्यथा तेरा सिर भी कलम कर (काट) दिया जाएगा। साहेब कबीर ने एक बार हाथ गऊ के दोनों टुकड़ों को लगाया तथा दूसरी बार उसके बच्चे के टुकड़ों को लगाया। उसी समय दोनों माँ-बेटा जीवित हो गए। साहेब कबीर ने गऊ से दूध निकाल कर बहुत बड़ी देग (बाल्टी) भर दी
तथा कहा - 
गऊ अपनी अम्मा है, इस पर छुरी न बाह। 
गरीबदास घी दूध को, सब ही आत्म खाय।।
चुटकी तारी थाप दे, गऊ जिवाई बेगि।
गरीबदास दूझन लगी, दूध भरी है देग।।

6."सेउ की कटी हुई गर्दन को जोड़ना"


परमात्मा कबीर ने अपने भक्त की कटी हुई गर्दन वापिस जोड़ दी थी।
 आओ सेउ जीम लो,यह प्रसाद प्रेम।
 सिर कटते हैं चोरों के,साधों के नित्य क्षेम।।
 ऐसी-2 बहुत लीलाएँ साहेब कबीर (कविरग्नि) ने की हैं जिनसे यह स्वसिद्ध है कि ये ही पूर्ण परमात्मा हैं। सामवेद संख्या नं. 822 तथा ऋग्वेद मण्डल 10 सूक्त 162 मंत्र 2 में कहा है कि कविर्देव अपने विधिवत् साधक साथी की आयु बढ़ा देता है।

7."जगन्नाथ के पांडे की कबीर जी द्वारा रक्षा"



जगन्नाथ पुरी में एक रामसहाय पाण्डा खिचड़ी का प्रसाद उतार रहा था। गर्म खिचड़ी उसके पैर पर गिर गई। उस समय कबीर जी अपने करमण्डल से हिम जल रामसहाय पाण्डा के पैर पर डाला। उसके तुरंत बाद राहत मिलते ही पैर ठीक हो गया। उस समय कबीर जी ना होते रामसहाय पाण्डा का पैर जल जाता।
गरीबदास जी देते हैं -
पग ऊपरि जल डालकर, हो गये खड़े कबीर। गरीबदास पंडा जरया, तहां परया योह नीर।।
जगन्नाथ जगदीश का, जरत बुझाया पंड। गरीबदास हर हर करत, मिट्या कलप सब दंड।।

8"भैंसे से वेद मन्त्र बुलवाना"



एक समय तोताद्रि नामक स्थान पर सत्संग था। सत्संग के पश्चात भण्डारा शुरू हुआ। भंडारे में भोजन करने वाले व्यक्ति को वेद के चार मन्त्र बोलने पर प्रवेश मिल रहा था। कबीर साहेब की बारी आई तब थोड़ी सी दूरी पर घास चरते हुए भैंसे को हुर्रर हुर्रर करते हुए बुलाया। तब कबीर जी ने भैंसे की कमर पर थपकी लगाई और कहा कि भैंसे इन पंडितों को वेद के चार मन्त्र सुना दे। भैंसे ने छः मन्त्र सुना दिए।

9."गोरखनाथ से गोष्ठी"



एक बार कबीर परमेश्वर जी और गोरखनाथ जी की गोष्ठी हुई। गोरखनाथ जी गंगा नदी की ओर चल पड़ा। उसमें जा कर छलांग लगाते हुए कबीर जी से कहा कि मुझे ढूंढ दो मैं आपका शिष्य बन जाऊँगा। गोरखनाथ मछली बन कर गए। कबीर साहेब ने उसी मछली को पानी से बाहर निकाल कर सबके सामने गोरखनाथ बना दिया। तब गोरखनाथ कबीर जी के शिष्य बने।

10."स्वामी रामानंद जी को जीवित करना"



दिल्ली के बादशाह सिकंदर लोधी ने स्वामी रामानंद जी की गर्दन तलवार से काट दी थी। कबीर साहेब जी ने देखा कि रामानंद जी का धड़ कहीं और सिर कहीं पर पड़ा था। तब कबीर साहेब ने मृत शरीर को प्रणाम किया और कहा कि गुरुदेव उठो। दूसरी बार कहते ही सिर अपने आप उठकर धड़ पर लग गया और रामानंद जी जीवित हो गए।

11."सिकंदर लोधी बादशाह के जलन का असाध्य रोग ठीक करना"

                    


कबीर परमेश्वर जी ने दिल्ली के बादशाह सिकंदर लोधी के जलन का असाध्य रोग आशीर्वाद मात्र से ठीक कर दिया। वह रोग जो किसी काजी, मुल्ला के जंत्र-मंत्र से भी ठीक नहीं हुआ था।

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कबीर परमात्मा को 52 बार मारने की कोशिश की गई।

नमस्कार दोस्तों मेरा नाम है लव कुश मैं आपका स्वागत करता हूं स्प्रिचुअल ब्लॉग मैं आज हम बात करेंगे परमात्मा को दी गई यातनाओं के बारे में कबीर परमेश्वर सतलोक से सशरीर आए थे और  सशरीर चले गए।

"खूनी हाथी से मरवाने की व्यर्थ चेष्टा"




शेखतकी के कहने पर दिल्ली के बादशाह सिकंदर लोधी ने कबीर परमेश्वर को खूनी हाथी से मरवाने की आज्ञा दे दी। शेखतकी ने महावत से कहकर हाथी को एक-दो शीशी शराब की पिलाने को कहा।
हाथी मस्ती में भरकर कबीर परमेश्वर को मारने चला। कबीर जी के हाथ-पैर बाँधकर पृथ्वी पर डाल रखा था। जब हाथी परमेश्वर कबीर जी से दस कदम (50 फुट) दूर रह गया तो परमेश्वर कबीर के पास बब्बर शेर खड़ा केवल हाथी को दिखाई दिया। हाथी डर से चिल्लाकर (चिंघाड़ मारकर) भागने लगा। परमेश्वर के सब रस्से टूट गए। उनका तेजोमय विराट रूप सिकंदर लोधी को दिखा। तब बादशाह ने कांपते हुए अपने गुनाह की माफी मांगी।


कबीर परमात्मा को तेल के खड़ाओ में डाला गया।


Kabir is god




कबीर परमेश्वर को शेखतकी ने उबलते हुए तेल में बिठाया। लेकिन कबीर साहेब ऐसे बैठे थे जैसे कि तेल गर्म ही ना हो। सिकन्दर बादशाह ने तेल के परीक्षण के लिए अपनी उंगली डाली, तो उसकी उंगली जल गई। लेकिन अविनाशी कबीर परमेश्वर जी को कुछ भी नहीं हुआ।

कबीर परमात्मा को तलवार से काटने की कुचेष्टा।


कबीर साहेब को मारने के लिए शेखतकी ने तलवार से वार करवाये। लेकिन तलवार कबीर साहेब के आर पार हो जाती क्योंकि कबीर साहेब का शरीर पाँच तत्व का नहीं बना था उनका नूरी शरीर था। फिर सभी लोगों ने कबीर साहेब की जय जयकार की।
साहेब कबीर को मारण चाल्या, शेखतकी जलील।

आर पार तलवार निकल ज्या, समझा नहीं खलील।।

परमात्मा तो अजर अमर है 
और किसी माता के गर्भ से जन्म नहीं लेते वह सतलोक से सशरीर आते हैं और शसरीर ही चले जाते हैं।
उन्होंने अपनी वाणी में कहां है-:



अविगत से चला आए, कोई मेरा भेद मरम नहीं पाया।
ना मेरा जन्म न गर्भ बसेरा बालक हो दिखलाया।।

काशीनगर जल कमल पर डेरा वहां जुलाए ने पाया।
मात-पिता मेरे कुछ नाही ना मेरे घर दासी।।

जुलहा का सुत आन कहाया जगत करें मेरी हांसी।

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MagharLeela_Of_GodKabir


MagharLeela_Of_GodKabir

नमस्कार दोस्तों में लव कुश आपका स्वागत करता हूं स्प्रिचुअल नॉलेज ब्लॉग में आज हम बात करेंगे कबीर परमात्मा की लीला की परमात्मा चारों युगों में आते हैं और किसी तालाब में कमल के फूल के ऊपर अवतरित होते हैं और इस प्रकार के लीला करते हैं तथा छोटी सी उम्र में ही वह ऋषि महर्षियों के ज्ञान में छक्के छुड़ा देते हैं। और अपने निजधाम सतलोक से यह सशरीर ही आते हैं और सशरीर ही जाते हैं।
उनकी जन्म और मृत्यु नहीं होती उसी को परमात्मा कहते हैं जिसका नाम कबीर है।



चार दाग से सतगुरु न्यारा, अजरो अमर शरीर।
दास मलूक सलूक कहत हैं, खोजो खसम कबीर।।

शिव जी के द्वारा श्राप दी हुई नदी मे जल बहाना


कबीर परमात्मा द्वारा शिवजी के श्राप से सूखी नदी में जल बहाना
मगहर में पहुंचते ही परमात्मा कबीर जी ने जब बहते पानी में स्नान करने की इच्छा जताई तो बिजली खां ने कहा कि यहां एक आमी नदी है जो शिवजी के श्राप से सूखी हुई है। परमात्मा कबीर जी ने नदी के किनारे पर पहुंचकर उंगली के इशारे से वर्षों से सूखी नदी में जल प्रवाहित कर दिया ।
Kabir is god

हिंदू मुसलमान के भेदभाव को मिटाना

हिंदू राजा बीर सिंह बघेल और मुस्लिम राजा बिजली ख़ाँ पठान को कबीर परमात्मा ने सतलोक जाने से पहले कहा जो मेरे जाने के बाद मिले आधा आधा बांट लेना। दो चद्दर और सुगंधित फूल मिले, परमात्मा का शरीर नहीं मिला था। 
बीरसिंघ बघेला करै बीनती , बिजली खाँ पठाना हो । दो चदरि बकसीस करी हैं , दीनां यौह प्रवाना हो ।।


हिन्दू व मुसलमानों के बीच धार्मिक सामंजस्य और भाईचारे की जो विरासत कबीर परमात्मा छोड़कर गए हैं उसे मगहर में आज भी जीवंत रूप में देखा जा सकता है।
मगहर में जहाँ कबीर परमेश्वर जी सशरीर सतलोक गए थे, वहां हिंदू-मुसलमानों के मंदिर और मजार 100-100 फुट की दूरी पर बने हुए हैं।
"कबीर, विहंसी कहयो तब तीनसै, मजार करो संभार।
हिन्दू तुरक नहीं हो, ऐसा वचन हमार।"


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GodKabir_Comes_In_4_Yugas

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Kabir is god
Kabir is supreme God


In the Dwapar Yuga, the Ashwamedha Yagna of the Pandavas was performed by the grace of God Kabir.
 In the Ashwamedha Yagna of Pandavas, many sages, Maharishi and Mandleshwar were present, even Lord Krishna was present, yet his conch did not blow.
 Kabir Parmeshwar played conch as Sudarshan Supach Valmiki and performed the yagya of the Pandavas.
 This is evident in the voice of Garib Das Ji Maharaj
 "Poor Supach Rup Dhari Aiya, Satguru Purush Kabir, Teen Lok Ki Medni, Sur Nar Muni Jan Bhir"


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Who is the creater of Universe


God Kabir creater of the universe

नमस्कार दोस्तों में लव कुश आपका स्वागत करता हूं स्पिरिचुअल नॉलेज ब्लॉग में आज हम बात करेंगे कि इस पूरे ब्रह्मांड का रचयिता कौन है किसने इसको बनाया और उसका नाम क्या है और वह कहां रहता है कैसे मिलता है और किसने देखा है। हम आपको बता दें कि बहुत से ऋषि और महर्षि यह कहते हैं कि यह सृष्टि परमात्मा ने रचाई है लेकिन वह नजर नहीं आते कोई कहता है कि यह सृष्टि अपने आप ही बन गई है इसे बनाने वाला कोई नहीं। लेकिन हमारे शास्त्र प्रमाणित करते हैं कि इस सृष्टि के रचयिता परमात्मा है जिनका नाम कबीर है आइए जानते हैं किन को परमात्मा मिले और किन्होंने ने प्रमाण दिए सृष्टि रचना के -:
कबीर पूर्ण परमात्मा है



सर्व सृष्टि रचनहार कबीर परमात्मा
आदरणीय गरीब दास जी को कबीर परमात्मा मिले थे, उन्होंने अपनी वाणीयों में अनेकों प्रमाण दिए हैं कि कबीर जी ही पूर्ण परमात्मा हैं, जिसने सर्व सृष्टि की रचना की।
"गरीब, जल थल पृथ्वी गगन में बाहर भीतर एक। पूर्ण ब्रह्म कबीर है, अविगत पुरुष अलेख।"


2. आदरणीय नानक साहिब जी को परमात्मा मिले




Kabir is supreme God



सर्व का रचनहार, दयालु,  सर्व सुखदाई परमात्मा कबीर साहेब जी हैं।
श्री गुरु ग्रन्थ साहेब, पृष्ठ नं. 721, महला 1, राग तिलंग
आदरणीय नानक साहेब जी की वाणी में लिखा है कि :-
यक अर्ज गुफतम पेश तो दर गोश कून करतार। हक्का कबीर करीम तू बेएब परवरदिगार।।


3. आदरणीय हजरत मोहम्मद जी को परमात्मा मिले


कुरान के अनुसार कबीर परमात्मा ने ही सारी सृष्टि रची
हजरत मुहम्मद को कुरान शरीफ बोलने वाला प्रभु (अल्लाह) कह रहा है कि वह अल्लाहु अकबर कबीर वही है जिसने जमीन तथा आसमान के बीच में जो कुछ भी विद्यमान है सर्व सृष्टी की रचना छः दिन में की तथा सातवें दिन ऊपर अपने सत्यलोक में तख्त पर विराजमान हो(बैठ) गया। क़ुरान सूरह अल-फुरकान 25 आयत 59

4. आदरणीय धर्मदास साहेब जी को परमात्मा मिले

Kabir is supreme God

"कबीर सागर" *अध्याय ज्ञानबोध खंड बोधसागर* के पृष्ठ 21 - 22 में धर्मदास जी को परमेश्वर कबीर साहेब ने अपने द्वारा रची सृष्टि की जानकारी दी है। जिसमें परमेश्वर कबीर जी ने ब्रह्म, दुर्गा, ब्रह्मा, विष्णु, शिव की उत्पत्ति की जानकारी दी है।

5. संत दादू साहिब जी को मिले परमात्मा

Kabir is supreme God
Kabir is supreme God


कबीर जी ही पूर्ण परमात्मा हैं व सर्व सृष्टि रचनहार हैं
संत दादू जी कहते हैं
जिन मोकू निज नाम दिया, सोई सतगुरु हमार।
दादू दूसरा कोई नहीं, कबीर सिरजनहार।।

6. आदरणीय मलूक दास साहेब जी
7. आदरणीय घीसादास साहेब जी
8. आदरणीय नामदेव साहेब जी
9. आदरणीय रामानंद जी
10. हनुमान जी
11. आदरणीय संत रामपाल जी

परमात्मा समय-समय पर कहीं ना कहीं किसी ने किसी को मिलते ही रहते हैं जो दृढ़ भक्त होते हैं उनको परमात्मा सत्य ज्ञान देकर उनको सतलोक ले जाते हैं।इन सभी महापुरुषों को परमात्मा मिले हैं और उनको सतलोक दिखा कर लाए हैं जहां पर परमात्मा रहते हैं और इन्हें सत्य ज्ञान दिया। तथा सृष्टि की रचना कैसे हुई इसकी असलियत बताई। और तत्वज्ञान से इनको समझाया कि मैं सतलोक में रहता हूं मेरा नाम कबीर है और मैं परमात्मा हूं सर्व ब्रह्मांड की रचना मैंने ही की है।

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आओ पर्यावरण बचाएं

आओ पर्यावरण बचाएं

नमस्कार दोस्तों
आज हम बात करेंगे पर्यावरण के बारे में देखा जा रहा है दुनिया में बढ़ते जा रहे हैं मशीनरी काम फैक्ट्री और वाहनों के कारण दिन-ब-दिन हमारा पर्यावरण दूषित होता जा रहा है साथ ही नदियों के किनारे बसे शहर नदियों को भी गंदा कर रहे हैं और इनमें से निकलता दुंआ पर्यावरण की ओजोन परत को क्षतिग्रस्त कर रहा है। पर्यावरण को दूषित करने में कोई भी व्यक्ति पीछे नहीं रह रहा है। कोई फैक्ट्री डाल रहा है तो कोई वनों की कटाई कर रहा है। और हम बढ़ते हुए समय के साथ नई-नई तकनीकों का इस्तेमाल करते ही जा रहे हैं परंतु पर्यावरण की तरफ हमारा जरा भी ध्यान नहीं है। पर्यावरण हमें शुद्ध वायु देती है । और समय-समय पर वर्षा देती हैं परंतु मानव ने आज पर्यावरण का सारा शेडूल ही बदल कर रख दिया है।
आओ पर्यावरण बचाएं। Save the nature
फैक्ट्री से निकलता दुआ

दूषित वातावरण  से नुकसान


आज मानव तरह-तरह की बीमारियों से ग्रसित हैं। और जिसकी आयु घटती जा रही हैं उसको स्वांस की बीमारी तो हो नहीं है। क्योंकि यह नियम हो गया अब कि जो भी वृद्ध होने को जा रहा है उसको स्वास की कमी तो होगी ही क्योंकि यह वातावरण बहुत ही दूषित कर दिया मानव ने इंसान प्रकृति को बदलना चाहता है। परंतु इस को अंदाजा नहीं प्रकृति क्या कर सकती है। प्रकृति के साथ छेड़छाड़ कर मानव ने बहुत बड़ी मुसीबत खड़ी कर दी हैं। आज जहां रेगिस्तान है वह वर्षा का नामोनिशान नहीं परंतु आज उस जगह भी ओले गिर रहे हैं और जहां वर्षा होनी चाहिए वहां वर्षा का पता ही नहीं। समय से पहले बरसात हो रही है बर्फ गिर रही है और आंधी तूफान आ रहे हैं बाढ़ आ रही हैं। यह सब मानव का ही किया धरा है। अगर हम प्रकृति को साथ लेकर चलें उसके अनुकूल चलें तो हम बच सकते हैं अन्यथा एक दिन हमारा अंत निश्चित है।

पर्यावरण को शुद्ध रखने के उपाय

शुद्ध पर्यावरण। fresh nature
 ऐसे होगापर्यावरण शुद्ध

हमको सभी को जगह-जगह पेड़ लगाने चाहिए और वनों की कटाई नहीं करनी चाहिए।
पुराने समय में ऋषि महर्षि हवन यज्ञआदि किया करते थे वर्षा के लिए जिससे समय पर वर्षा होती है। परंतु उससे भी सहज उपाय संत रामपाल जी महाराज ने बताए हैं उन्होंने वेदों अनुसार साधना बताइए जिससे पर्यावरण को बचाया जा सकता है और समय-समय पर बरसात भी हो सकती हैं। वेदों में प्रमाण है की अगर हम ज्योति जलाएं जिसमें कम कार्बन डाइऑक्साइड निकलती है और उसका वाष्पीकरण होता है तो वह पूरे ब्रह्मांड में जाता है जिससे समय-समय पर वर्षा होती हैं। ना की हवन में किलो के किलो लकड़ियां और क्विंटल घी जलाने से। और कैसे हैं बहुत से सहज उपाय बताए हैं जिसे मानव अपने कल्याण की ओर निरंतर बढ़ रहा है ।

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धन्यवाद

भक्ति क्यों जरूरी है


भक्ति क्यों जरूरी है

अपने शास्त्रों में लिखा है और सभी कहते हैं कि मनुष्य जीवन सिर्फ मोक्ष प्राप्त करने के लिए ही मिलता है और मनुष्य जीवन में बातें करना बहुत ही आवश्यक है। परमेश्वर ने कहां है

मानुष जन्म दुर्लभ है मिले ना बारंबार तरुवर से पत्ता टूट गिरे फिर बहुर ना लगता डाल।।
भक्ति क्यों जरूरी है। सत्संग क्यों जरूरी है


अगर इसमें से जीवन से चूक गए और सत भक्ति कि नहीं पूर्ण गुरु से नाम दीक्षा लेकर शास्त्र अनुसार भक्ति नहीं की तो 84 लाख योनि मैं कष्ट उठाना पड़ेगा उनमें कुत्ते गधे सूअर आदि बनना पड़ेगा।

गरीब नर सेती तू पशुआ कीजिए गधा बेल बनाई छप्पन भोग कहां मन बोरे कुरड़ी चरने जाई।।

सत्संग सुनना चाहिए। सत्संग से मिले लाभ

मनुष्य जीवन सिर्फ और सिर्फ परमात्मा की भक्ति करके मुक्त करवाने के लिए ही मिला है क्योंकि आज हम देखते हैं यहां किसी का कोई भरोसा नहीं है कभी मां मर जाती है कभी भाई मर जाता है कभी कहीं एक्सीडेंट हो जाता है और अचानक हंसते खेलते मृत्यु को प्राप्त हो जाते हैं यहां जीवन बहुत ही कठिन है इसलिए हमें उस सच्चे लोग की तलाश करनी होगी। जो हमें जीने की राह सिखाते हैं जहां जाने के पश्चात लोट करे संसार में कभी नहीं आते गीता 

अध्याय नंबर 18 के श्लोक नंबर 62 में भी कुछ इस प्रकार ही कहा है की है अर्जुन तू सर्व  भाव से उस परमेश्वर की शरण में जा जहां जाने के पश्चात तू लोट कर इस संसार में कभी नहीं आएगा और मैं तुझे सर्व पापों से मुक्त कर दूंगा।।

वह परमात्मा सर्व पापों को काट देता है और सर्व सुख प्रदान करता है वह कभी किसी को दुख नहीं देता। और जिस लोक में हम रह रहे हैं यह काल का लोक हैं जहां हरदम हमें कष्ट पर कष्ट उठाने पड़ते हैं। अगर हमेशा के लिए अजर अमर होना है और इन 8400000 योनियों में नहीं आना तो पूर्ण गुरु से नाम दीक्षा लेकर सत भक्ति करनी चाहिए और जीवन कल्याण करवाना चाहिए।

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सत साहेब

भगवान कैसा है

               
                     1.  शास्त्रों में प्रमाण

         गुरु नानक,धर्मदास जी, गरीब दास जी महाराज,घीसा दास, दादू जी सभी ने सतलोक को देखा और सतलोक में विराजमान कबीर परमात्मा को देखा है। और फिर इन महापुरुषों ने कबीर परमात्मा की कलमतोड़ महिमा लिखी।
God in form / God bless
God in form


ऋग्वेद मण्डल 9 सूक्त 96 मंत्र 18 में प्रमाण है कि पूर्ण परमात्मा कविर्देव तीसरे मुक्ति धाम अर्थात् सतलोक में रहता है। जहाँ जाने के बाद मनुष्य का फिर से जन्म मरण नहीं होता है।
पवित्रा बाईबल तथा पवित्रा कुरान शरीफ में सृष्टी रचना का प्रमाण“
इसी का प्रमाण पवित्रा बाईबल में तथा पवित्रा कुरान शरीफ में भी है।
कुरान शरीफ में पवित्रा बाईबल का भी ज्ञान है, इसलिए इन दोनों पवित्रा सद्ग्रन्थों
ने मिल-जुल कर प्रमाणित किया है कि कौन तथा कैसा है सृष्टी रचनहार तथा उसका
वास्तविक नाम क्या है।
पवित्रा बाईबल (उत्पत्ति ग्रन्थ पृष्ठ नं. 2 पर, अ. 1ः20 - 2ः5 पर)
छटवां दिन :- प्राणी और मनुष्य :
अन्य प्राणियों की रचना करके 26. फिर परमेश्वर ने कहा, हम मनुष्य को अपने स्वरूप
के अनुसार अपनी समानता में बनाएं, जो सर्व प्राणियों को काबू रखेगा।

Kabir is god / Jesus
God save us 


27. तब परमेश्वर ने
मनुष्य को अपने स्वरूप के अनुसार उत्पन्न किया, अपने ही स्वरूप के अनुसार परमेश्वर ने
उसको उत्पन्न किया, नर और नारी करके मनुष्यों की सृष्टी की।
29. प्रभु ने मनुष्यों के खाने के लिए जितने बीज वाले छोटे पेड़ तथा जितने पेड़ों में बीज
वाले फल होते हैं वे भोजन के लिए प्रदान किए हैं, (माँस खाना नहीं कहा है।)
सातवां दिन :- विश्राम का दिन :
परमेश्वर ने छः दिन में सर्व सृष्टी की उत्पत्ति की तथा सातवें दिन विश्राम किया।
पवित्रा बाईबल ने सिद्ध कर दिया कि परमात्मा मानव सदृश शरीर में है, जिसने
छः दिन में सर्व सृष्टी की रचना की तथा फिर विश्राम किया।

पवित्रा कुरान शरीफ (सुरत फुर्कानि 25, आयत नं. 52, 58, 59)
आयत 52 :- फला तुतिअल् - काफिरन् व जहिद्हुम बिही जिहादन् कबीरा
(कबीरन्)।।52।
इसका भावार्थ है कि हजरत मुहम्मद जी का खुदा (प्रभु) कह रहा है कि हे पैगम्बर !
आप काफिरों (जो एक प्रभु की भक्ति त्याग कर अन्य देवी-देवताओं तथा मूर्ति आदि की
पूजा करते हैं) का कहा मत मानना, क्योंकि वे लोग कबीर को पूर्ण परमात्मा नहीं मानते।
आप मेरे द्वारा दिए इस कुरान के ज्ञान के आधार पर अटल रहना कि कबीर ही पूर्ण प्रभु है
तथा कबीर अल्लाह के लिए संघर्ष करना (लड़ना नहीं) अर्थात् अडिग रहना।
आयत 58 :- व तवक्कल् अलल् - हरिल्लजी ला यमूतु व सब्बिह् बिहम्दिही व कफा
बिही बिजुनूबि िअबादिही खबीरा (कबीरा)।।58।
भावार्थ है कि हजरत मुहम्मद जी जिसे अपना प्रभु मानते हैं वह अल्लाह (प्रभु)
किसी और पूर्ण प्रभु की तरफ संकेत कर रहा है कि ऐ पैगम्बर उस कबीर परमात्मा पर
विश्वास रख जो तुझे जिंदा महात्मा के रूप में आकर मिला था। वह कभी मरने वाला
नहीं है अर्थात् वास्तव में अविनाशी है। तारीफ के साथ उसकी पाकी (पवित्रा महिमा)
का गुणगान किए जा, वह कबीर अल्लाह (कविर्देव) पूजा के योग्य है
               2. कौन तथा कैसा है कुल का मालिक
श्री रामानन्द जी मेरे गुरु जी हैं। यह कह कर श्री धर्मदास जी की आत्मा को
वापिस शरीर में भेज दिया। श्री धर्मदास जी का शरीर दो दिन बेहोश रहा, तीसरे
दिन होश आया तो काशी में खोज करने पर पाया कि यही काशी में आया धाणक
ही पूर्ण परमात्मा (सतपुरुष) है। आदरणीय धर्मदास साहेब जी ने पवित्रा कबीर
सागर, कबीर साखी, कबीर बीजक नामक सद्ग्रन्थों की आँखों देखे तथा पूर्ण
परमात्मा के पवित्रा मुख कमल से निकले अमृत वचन रूपी विवरण से रचना की।
अमृत वाणी में प्रमाण :


आज मोहे दर्शन दियो जी कबीर।।टेक।।
सत्यलोक से चल कर आए, काटन जम की जंजीर।।1।।
थारे दर्शन से म्हारे पाप कटत हैं, निर्मल होवै जी शरीर।।2।।
अमृत भोजन म्हारे सतगुरु जीमैं, शब्द दूध की खीर।।3।।
हिन्दू के तुम देव कहाये, मुस्लमान के पीर।।4।।
दोनों दीन का झगड़ा छिड़ गया, टोहे ना पाये शरीर।।5।।
धर्मदास की अर्ज गोसांई, बेड़ा लंघाईयो परले तीर।।6।
(ख) आदरणीय दादू साहेब जी (अमृत वाणी में प्रमाण) कबीर परमेश्वर
के साक्षी -
आदरणीय दादू साहेब जी जब सात वर्ष के बालक थे तब पूर्ण परमात्मा जिंदा
महात्मा के रूप में मिले तथा सत्यलोक ले गए। तीन दिन तक दादू जी बेहोश रहे।
होश में आने के पश्चात् परमेश्वर की महिमा की आँखों देखी बहुत-सी अमृतवाणी
उच्चारण की :

जिन मोकुं निज नाम दिया, सोइ सतगुरु हमार। दादू दूसरा कोई नहीं, कबीर सृजन हार।।
दादू नाम कबीर की, जै कोई लेवे ओट। उनको कबहू लागे नहीं, काल बज्र की चोट।।
दादू नाम कबीर का, सुनकर कांपे काल। नाम भरोसे जो नर चले, होवे न बंका बाल।।
जो जो शरण कबीर के, तरगए अनन्त अपार। दादू गुण कीता कहे, कहत न आवै पार।।
कबीर कर्ता आप है, दूजा नाहिं कोय। दादू पूरन जगत को, भक्ति दृढावत सोय।।
ठेका पूरन होय जब, सब कोई तजै शरीर। दादू काल गँजे नहीं, जपै जो नाम कबीर।।
आदमी की आयु घटै, तब यम घेरे आय। सुमिरन किया कबीर का, दादू लिया बचाय।।
मेटि दिया अपराध सब, आय मिले छनमाँह। दादू संग ले चले, कबीर चरण की छांह।।
सेवक देव निज चरण का, दादू अपना जान। भृंगी सत्य कबीर ने, कीन्हा आप समान।।
दादू अन्तरगत सदा, छिन-छिन सुमिरन ध्यान। वारु नाम कबीर पर, पल-पल मेरा प्रान।।
सुन-2 साखी कबीर की, काल नवावै माथ। धन्य-धन्य हो तिन लोक में, दादू जोड़े हाथ।।
केहरि नाम कबीर का, विषम काल गज राज। दादू भजन प्रतापते, भागे सुनत आवाज।।
पल एक नाम कबीर का, दादू मनचित लाय। हस्ती के अश्वार को, श्वान काल नहीं खाय।।
सुमरत नाम कबीर का, कटे काल की पीर। दादू दिन दिन ऊँचे, परमानन्द सुख सीर।।
दादू नाम कबीर की, जो कोई लेवे ओट। तिनको कबहुं ना लगई, काल बज्र की चोट।।
और संत सब कूप हैं, केते झरिता नीर। दादू अगम अपार है, दरिया सत्य कबीर।।
अबही तेरी सब मिटै, जन्म मरन की पीर। स्वांस उस्वांस सुमिरले, दादू नाम कबीर।।
कोई सर्गुन में रीझ रहा, कोई निर्गुण ठहराय। दादू गति कबीर की, मोते कही न जाय।।

                         वेदों में प्रमाण

वेदों में प्रमाण prave in vedas



ऋग्वेद मं. 10 सु. 49 मं. 1 तथा 6त्र यजुर्वेद अध्याय 13 मं.
4 में) - हे मनुष्यों जो सृष्टी
के पूर्व सर्व की उत्पति करता तथा सर्व का स्वामी था, है, आगे भी रहेगा वही सर्व
सृष्टी को बनाकर धारण कर रहा है। उस सुख स्वरूप परमात्मा की भक्ति जैसे
हम (ब्रह्म तथा अन्य देव भी उसी की साधना) करते हैं वैसे ही तुम लोग भी करो।
प्रमाण - 1. पवित्रा यजुर्वेद अध्याय 29 मंत्रा 25 -
समिद्धोऽअद्य मनुषो दुरोणे देवो देवान्यजसि जातवेदः।
आ च वह मित्रामहश्चिकित्वान्त्वं दूतः कविरसि प्रचेताः।।25।।
 समिद्धः-अद्य-मनुषः-दुरोणे-देवः-देवान्-यज्-असि- जात-वेदः-आ- च-वह-
मित्रामहः-चिकित्वान्-त्वम्-दूतः- कविर्-असि-प्रचेताः।
 अनुवाद - (अद्य) आज अर्थात् वर्तमान में (दुरोणे) शरीर रूप महल में दुराचार पूर्वक
(मनुषः) झूठी पूजा में लीन मननशील व्यक्तियों को (समिद्धः) लगाई हुई आग अर्थात् शास्त्रा
विधि रहित वर्तमान पूजा जो हानिकारक होती है, अग्नि जला कर भस्म कर देती है ऐसे साधक
का जीवन शास्त्राविरूद्ध साधना नष्ट कर देती है। उसके स्थान पर (देवान्) देवताओं के (देवः)
देवता (जातवेदः) पूर्ण परमात्मा सतपुरुष की वास्तविक (यज्) पूजा (असि) है। (आ) दयालु ,
(मित्रामहः) जीव का वास्तविक साथी पूर्ण परमात्मा के (चिकित्वान्) स्वस्थ ज्ञान अर्थात् यथार्थ
भक्ति को (दूतः) संदेशवाहक रूप में (वह) लेकर आने वाला (च) तथा (प्रचेताः) बोध कराने वाला
(त्वम्) आप (कविर्देव अर्थात् कबीर परमेश्वर) कबीर (असि) है।
भावार्थ :- जिस समय भक्त समाज को शास्त्राविधी त्यागकर मनमाना आचरण
(पूजा) कराया जा रहा होता है। उस समय कविर्देव (कबीर परमेश्वर) तत्व ज्ञान
को प्रकट करता है।
 प्रमाण 2. पवित्रा सामवेद संख्या 1400 में
 संख्या न. 359 सामवेद अध्याय न. 4 के खण्ड न. 25 का श्लोक न. 8 -
पुरां भिन्दुर्युवा कविरमितौजा अजायत। इन्द्रो विश्वस्य कर्मणो धर्ता वज्री पुरुष्टुतः ।।4।।
 पुराम्µभिन्दुःµयुवाµकविर्µअमितµऔजाµ अजायतµइन्द्रःµविश्वस्यµ कर्मणःµ
धर्ताµवज्रीµ पुरूष्टुतः।
 शब्दार्थ :- (युवा) पूर्ण समर्थ (कविर्) कविर्देव अर्थात् कबीर परमेश्वर (अमितऔजा) विशाल
शक्ति युक्त अर्थात् सर्व शक्तिमान है (अजायत) तेजपुंज का शरीर मायावयी बनाकर (धर्ता)
प्रकट होकर अर्थात् अवतार धारकर (वज्री) अपने सत्यशब्द व सत्यनाम रूपी शस्त्रा से (पुराम्)
काल-ब्रह्म के पाप रूपी बन्धन रूपी कीले को (भिन्दुः) तोड़ने वाला, टुकड़े-टुकड़े करने वाला
(इन्द्रः) सर्व सुखदायक परमेश्वर (विश्वस्य) सर्व जगत के सर्व प्राणियों को (कर्मणः) मनसा वाचा
कर्मणा अर्थात् पूर्ण निष्ठा के साथ अनन्य मन से धार्मिक कर्मो द्वारा सत्य भक्ति से (पुरूष्टुतः)
स्तुति उपासना करने योग्य है।
{जैसे बच्चा तथा वृद्ध सर्व कार्य करने में समर्थ नहीं होते जवान व्यक्ति सर्व कार्य करने
की क्षमता रखता है। ऐसे ही परब्रह्म-ब्रह्म व त्रिलोकिय ब्रह्मा-विष्णु-शिव तथा अन्य देवी-देवताओं
को बच्चे तथा वृद्ध समझो इसलिए कबीर परमेश्वर को युवा की उपमा वेद में दी है}
भावार्थ :- जो कविर्देव (कबीर परमेश्वर) तत्वज्ञान लेकर संसार में आता है। वह
सर्वशक्तिमान है तथा काल (ब्रह्म) के कर्म रूपी किले को तोड़ने वाला है वह सर्व सुखदाता

है तथा सर्व के पुजा करने योग्य है
और भी अनेकों प्रमाण है जिन से सिद्ध होता है कि कबीर ही पूर्ण परमात्मा है और सबका मालिक है जो आज इस पृथ्वी पर संत रामपाल जी महाराज के रूप में अवतरित हुए हैं और हमें सतलोक ले जाने के लिए नाम लिख साथ दे रहे हैं और हमें सचेत कर रहे हैं कि वापस अपने सतलोक पर चलो।

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