Krishna Janmashtami
कृष्ण जन्माष्टमी कृष्ण जी के जन्म होने के उपलक्ष में यह पर्व मनाया जाता है। कृष्ण जी के जन्म के दिन लोग बड़े धूमधाम से उनके जन्मदिन को मनाते हैं और खुशियां मनाते हैं। परंतु दोस्तों आज हम इस अवसर पर आपको कुछ ऐसा बताएंगे जिससे आप दंग रह जाएंगे। आइए जानते हैं हमारे वेदों पुराणों और गीता में कहीं भी नहीं लिखा कि परमात्मा जन्म लेता है अपितु उसमें परमात्मा को जन्म लेने वाला बताया है परमात्मा किसी मां के गर्भ से जन्म नहीं लेता वह स्वयं प्रकट होता है किसी कमल के फूल के ऊपर और कोई दंपत्ति उन्हें वहां से उठाकर ले जाते हैं तथा कुंवारी गायों से उनकी परवरिश होती है इसी रोचक तथ्य पर हम बात करते हैं।
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कृष्ण जन्माष्टमी कृष्ण जी के जन्म होने के उपलक्ष में यह पर्व मनाया जाता है। कृष्ण जी के जन्म के दिन लोग बड़े धूमधाम से उनके जन्मदिन को मनाते हैं और खुशियां मनाते हैं। परंतु दोस्तों आज हम इस अवसर पर आपको कुछ ऐसा बताएंगे जिससे आप दंग रह जाएंगे। आइए जानते हैं हमारे वेदों पुराणों और गीता में कहीं भी नहीं लिखा कि परमात्मा जन्म लेता है अपितु उसमें परमात्मा को जन्म लेने वाला बताया है परमात्मा किसी मां के गर्भ से जन्म नहीं लेता वह स्वयं प्रकट होता है किसी कमल के फूल के ऊपर और कोई दंपत्ति उन्हें वहां से उठाकर ले जाते हैं तथा कुंवारी गायों से उनकी परवरिश होती है इसी रोचक तथ्य पर हम बात करते हैं।
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मीराबाई की भक्ति की सच्चाई
श्री कृष्ण जी की भक्ति मीराबाई जी ने की थी उनसे प्रत्यक्ष बात करती थी। तथा उनके लिए कुछ भी करने के लिए तैयार थी यहां तक कि उन्होंने अपनी जान के भी प्रवाह ना की परंतु सच्चाई हम आपको बताते हैं उनके जीवन में उनकी भेंट संत रविदास जी से हुई जिन्होंने उन्हें बताया कि श्री कृष्ण जी से ऊपर कोई और सकती है जिन्हें परमात्मा कहते हैं और उनका नाम कबीर है वह दंग रह गई संत रविदास जी ने कहा आप स्वयं श्री कृष्ण जी से पूछ सकते हैं मीरा बाई जी ने ऐसा ही किया।और एक रात सिर्फ कृष्ण जी से बात की तथा कहा कि क्या आप मेरी जन्म और मृत्यु से बात कर सकते हो तो श्री कृष्ण जी ने मना कर दिया कहा यह हम नहीं कर सकते।और फिर मेरा भाई को यकीन हो गया और उन्होंने संत रविदास जी से नाम दीक्षा लेकर परमात्मा की भक्ति की तथा अपना मोक्ष करवाया।![]() |
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पांडवों के यज्ञ को सफल बनाना
एक समय पांडवों ने यज्ञ किया जिसमें सभी ऋषि-मुनियों को आमंत्रित किया यहां तक कि श्री कृष्ण जी भी उस यज्ञ में शामिल थे। पांडव उन्हें अपना गुरु मानते थे। और उनके आदेश अनुसार वह कार्य करते थे। सभी को भोजन कराया गया परंतु वह संख नहीं बजा। उन सब के बाद एक सुपच सुदर्शन नाम के महात्मा थे जिन्होंने परमात्मा कबीर देव जी से नाम ले रखा था। उनको उस यज्ञ में बुलाया गया ऐसा भोजन कराया।जैसे ही उन्होंने भोजन का पहला निवाला मुंह में रखा शंख बजने लगा । परंतु वही संख श्री कृष्ण जी के भोजन करने पर नहीं बजा। इससे सिद्ध हैं कि श्री कृष्ण जी परमात्मा नहीं है। यह तीनों गुणों में से एक हैं यह सत्वगुण प्रधान है और इनकी भी जन्म और मृत्यु होती हैं यह परमात्मा नहीं है।निष्कर्ष और समाधान
प्रिय पाठकों आपको हम यह बता दें कि परमात्मा साकार है और उसका नाम कबीर है जिसका वर्णन ऋग्वेद मंडल नंबर 9 सितंबर 82 और मंत्र नंबर एक में है। वह परमात्मा अविनाशी है जो सतलोक में रहता है। वह परमात्मा कुछ भी कर सकता है और सर्वगुण संपन्न नहीं तथा सर्वशक्तिमान है। कृष्ण जी ने ताम्रध्वज को जिंदा किया था जिसको आने से चिरवा दिया गया था। परंतु अपने ही भांजे प्रद्युमन को जिंदा नहीं कर सके। इससे स्पष्ट है कि यह सिर्फ उतना ही दे सकते हैं जितना तुम्हारे भाग्य में है या जो तुमने कर्म किया है। जबकि कबीर परमात्मा आपको सब कुछ दे सकते हैं यहां तक कि आपकी आयु भी बढ़ा सकते हैं और मौत को भी मात दे सकते हैं।अधिक जानकारी के लिए अवश्य देखें साधना चैनल शाम 7:30 से 8:30 तक ।
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